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Tuesday, December 13, 2016

धमेख स्तूप, सारनाथ



सारनाथ में स्थित यह विशाल स्तूप वाराणसी से 13 किमी दूर है। इसका निर्माण 500 ईस्वी में सम्राट अशोक द्वारा 249 ईसा पूर्व बनाए गए एक स्तूप व अन्य कई स्मारक के स्थान पर किया गया था। दरअसल सम्राट अशोक ने अपने शासनकाल में कई स्तूप बनवाए। इन स्तूपों में गौतम बुद्ध से जुड़ी निशानियां रखी गईं थी। यहां पास में ही एक अशोक स्तंभ भी है।

ऐसा माना जाता है कि डीयर पार्क में स्थित धमेख स्तूप ही वह जगह है, जहां भगवान बुद्ध ने ज्ञान की प्राप्ति के बाद अपने शिष्यों को पहला उपदेश दिया था। यहीं पर उन्होंने आर्य अष्टांग मार्ग की अवधारणा को बतलाया था, जिसपर चल कर व्यक्ति मोक्ष की प्राप्ति कर सकता है। इस स्तूप को छह बार बड़ा किया गया। इसके बावजूद इसका ऊपरी हिस्सा अधूरा ही रहा।

एक चीनी यात्री जुआन जांग ने पांचवीं शताब्दी में सारनाथ का भ्रमण किया था। उन्होंने लिखा है कि उस समय कॉलोनी में 1500 से ज्यादा धर्माचार्य थे और मुख्य स्तूप करीब 300 फीट ऊंचा था।


 

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