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Thursday, December 22, 2016

कालाधन रखने वाले 67.54 लाख लोगों पर मोदी सरकार की नजर

काले धन के खिलाफ अभियान में छोटी मछलियों के बाद बारी अब बड़ी मछलियों की है। नोटबंदी के फैसले के बाद महज छोटी मछलियों के ही कार्रवाई की गिरफ्त में आने की बन रही धारणा से सतर्क मोदी सरकार इसे पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले हर हाल में धो देना चाहती है।

इस धारणा को ध्वस्त करने के लिए सरकार नए साल के जनवरी महीने में अघोषित संपत्ति मामले में सघन अभियान चला कर बड़ी मछलियों को निशाना बनाएगी। इस संबंध में सरकार ने कार्रवाई की रूप रेखा तैयार कर ली है। अभियान पूरे महीने चलेगा। इस दौरान सरकार की निगाह काली कमाई करने वाली बड़ी हस्तियों पर होगी।

काले धन के खिलाफ अभियान के नाम पर लिए गए नोटबंदी के फैसले के करीब डेढ़ महीने बाद भी किसी बड़ी हस्ती तक जांच या छापे की कार्रवाई की आंच नहीं पहुंची है। सरकार के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी नोटबंदी के फैसले के प्रतिकूल पक्षों की भी पूरी जानकारी रख रहे हैं।

इनमें छोटी काली कमाई करने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई, लोगों को नकदी हासिल करने में हो रही परेशानी, फैसले के बाद रोजगार क्षेत्र में पड़ा प्रतिकूल प्रभाव जैसी सूचनाएं शामिल हैं। उन्हें इस फैसले के बाद बड़ी हस्तियों के खिलाफ कार्रवाई न होने के कारण बन रही धारणा का भी अंदाजा पहले से ही था।

यही कारण है कि नोटबंदी के फैसले के साथ ही उन्होंने अघोषित संपत्ति रखने वालों के लिए खिलाफ अभियान की रूपरेखा तैयार कर ली थी। उसी समय यह तय हो गया था कि 31 दिसंबर के बाद नए साल में अघोषित संपत्ति के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा।

एक साथ चलेगा कार्रवाइयों का दौर


इस क्रम में एक साथ कई तरह की कार्रवाई का दौर चलेगा। मसलन अघोषित संपत्ति के खिलाफ व्यापक अभियान तो शुरू होगा ही, इसके साथ ही छोटे और मध्यम स्तर की काली कमाई करने वालों के खिलाफ अभियान का सिलसिला भी जारी रहेगा।

पीएम मोदी खासतौर से काले धन को सफेद करने में कुछ बैंकों और बैंककर्मियों की भूमिका से भी सख्त नाराज हैं। ऐसे में भ्रष्ट बैंककर्मियों पर भी गाज गिरनी तय है।

8 नवंबर के बाद के ट्रांजेक्शन पर खास निगाह
भ्रष्ट बैंककर्मियों के साथ-साथ बैंक के माध्यम से काला धन सफेद करने वालों को हर हाल में गिरफ्त में लेने के लिए वित्त मंत्रालय नोटबंदी के फैसले के बाद हुए एक लाख के ऊपर के सभी ट्रांजेक्शन को जांच के दायरे में रखा है। बैंकों से इससे संबंधित सारे दस्तावेज और सूचना हासिल कर संबंधित खातों के साथ-साथ बैंकों पर भी निगरानी रखी जा रही है।

मोदी सरकार भ्रष्ट बैंककर्मियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई कर भ्रष्टाचार के मामले को किसी भी सूरत में बर्दाश्त न करने का भी सियासी संदेश देना चाहती है।

अभियान के लिए जनवरी महीना ही क्यों
दरअसल उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में जनवरी महीने के बाद किसी भी समय विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। मोदी सरकार के रणनीतिकारों का मानना है कि अगर बड़े स्तर पर लगातार कार्रवाई का विकल्प नहीं चुना गया तो नोटबंदी के फैसले का समर्थन करने वाला बड़ा वर्ग ऐन चुनाव के मौके पर नाराज हो सकता है।